
सूर्यकांत जोशी कुडाळ 9421214450
देवीची 108 शक्तीपीठे
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(१) विशालाक्षी – वाराणसी, (२) लिंगधारिणी – नैमिषारण्य, (३) ललिता – प्रयाग, (४) कामाक्षी – गंधमादन पर्वत, (५) कुमुदा – मानस सरोवरस, (६) विश्वकामा – दक्षिणेत आणि उत्तरेस भगवती, (६) गोमती – गोमंत पर्वत, (७) कामचारिणी – मंदार पर्वत, (८) मदोत्कटा – चैत्ररथबन, (९) जयंती – हस्तिनापूर,
(१०) गौरी – कान्यकुब्ज, (११) रंभा – मलय पर्वत, (१२) कार्तिमती – एकाम्रक पर्वत, (१३) विश्वेश्वरी – विश्वेश्वर क्षेत्र, (१४) पुरुहुता – पुष्कर, (१५) सन्मार्ग दायिनी – केदार, (१६) नंदा – हिमालय, (१७) भद्रकर्णिका – गोकर्ण, (१८) भवानी – ठाणेश्वर, (१९) बिल्वपत्रिका – बिल्वकपीठ, (२०) माधवी – श्रीशैव, (२१) भद्रा – भद्रेश्वर, (२२) जया – वराह पर्वत, (२३) कमला – कमलालय, (२४) रुद्राणी – रुद्रकोटितीर्थ, (२५) काली – कलंजर पर्वत, (२६) कपिला – महालिंग क्षेत्र, (२७) महादेवी – शाळिग्राम क्षेत्र, (२८) जळप्रिया – शिवलिंग क्षेत्र, (२९) मुकुटेश्वरी – मोकाट क्षेत्र, (30) कुमारी – मायापुरी, (३१) ललिताम्बिका – संतान क्षेत्र, (३२) मंगला – गया (३३) उत्पलाक्षी – सहस्राक्ष क्षेत्र, (३४) महोत्पला – हिरणाक्ष क्षेत्र, (३५) अमोद्याक्षी – विवाशा नदीवर विशाखा क्षेत्र, (३६) पाडळा – पुंड्रवर्धन क्षेत्र, (३७) नारायणी – सुपार्श्व, (३८) रुद्रसुंदरी – चित्रकूट पर्वत, (३९) विपुला – विपुल क्षेत्र, (४०) कल्याणी – मलयाचल पर्वत, (४१) एकवीरा – सह्याद्री पर्वत, (४२) चंद्रिका – हरिश्चंद्रपीठ, (४३) रमणा – रामतीर्थ, (४४) मृगावती – यमुनापीठ, (४५) कोटवी- कोटितीर्थ, (४६) सुगंधा – मधुवन, (४७) त्रिसंध्या – गोदावरी तीर, (४८) रतिप्रिया – गंगाद्वार, (४९) शुभानन्दा – शिवकुंड, (५०) नंदिनी – देविका नदीतटी,
(५१) रुक्मिणी – द्वारका, (५२) राधा – वृंदावन, (५३) देवकी – मथुरा, (५४) परमेश्वरी – पाताळ, (५५) सीता – चित्रकूट, (५६) विंध्यवासिनी – विंध्याचल, (५७) महालक्ष्मी – करवीर क्षेत्र, (५८) उमा – विनायक क्षेत्र, (५९) आरोग्या – वैद्यनाथ, (६०) माहेश्वरी – महाकालपीठ, (६१) अभया – उष्णतीर्थ, (६२) नितंबा – विंध्य पर्वतावर, (६३) मांडवी – मांडव्य पीठ, (६४) स्वाहा – माहेश्वरीपूर, (६५) प्रचंडा – छगलंड क्षेत्र, (६६) चंडिका – अमरकंटक, (६७) वरारोहा – सोमेश्वर, (६८) पुष्करावती – प्रभास क्षेत्र, (६९) देवमाता – सरस्वती तीर्थ, (७०) पारावारा – पारा नदीतटी, (७१) महाभागा – महालय क्षेत्र, (७२) पिंगळेश्वरी – पयोष्णी, (७३) सिंहिका – कृतशौचतीर्थ, (७४) अतिशांकरी – कार्तिकस्वामी तीर्थ, (७५) उत्पला – वर्तक तीर्थ, (७६) लोला – शोण नदीसंगम, (७७) लक्ष्मी – सिद्धवन, (७८) अनंगा – भारताश्रम तीर्थ, (७९) विश्वमुखी – जालंधर पर्वत, (८०) तारा – किष्किन्धा पर्वत, (८१) पुष्टि – देवदारुवन, (८२) मेधा – काश्मीर प्रदेश, (८३) भीमा – हिमालय पर्वत, (८४) तुष्टि – विश्वेश्वर क्षेत्र, (८५) शुद्धिकाया – कपाळमोचन तीर्थ, (८६) माता – कायावरोह तीर्थ, (८७) धरा – शंखोधर तीर्थ, (८८) धृति – पिंडारक तीर्थ, (८९) कळा – चंद्रभागा नदीतटी, (९०) शिवधारिणी – अच्छोद क्षेत्र, (९१) अमृता – वेणा नदीतटी, (९२) उर्वशी – बदरी वन, (९३) ओषधि – उत्तरकुरू प्रदेश, (९४) कुशोदका – कुशद्वीप, (९५) मन्मथा – हेमकूट पर्वत, (९६) सत्यवादिनी – कुमुद वन, (९७) वंदनीया – अश्वत्थ तीर्थ, (९८) निधी – वैश्रवणालय क्षेत्र (कुबेरगृह), (९९) गायत्री – वेदवदन तीर्थ, (१००) पार्वती – भगवान शंकराच्या सान्निध्यात (१०१) इंद्राणी -देवलोकात, (१०२) सरस्वती – ब्रह्मलोकात, (१०३) प्रभा – सूर्यबिंबाच्या ठिकाणी, (१०४) वैष्णवी – मातृकामध्ये, (१०५) अरुंधती – पतिव्रता स्त्रीवर्गामध्ये, (१०६) तिलोत्तमा – अप्सरांमध्ये, (१०७) विमला – पुरुषोत्तम पीठ, (१०८) ब्रह्मकला – प्राणिमात्रांच्या चित्तामध्ये वास करीत असते.
हे एकशे आठ पीठांचे देवीस्तोत्र जो रोज पठण करील अगर सर्व पीठ-देवतांचे दर्शन घेईल, त्यावर देवीची कृपा सदैव राहील, असे फळ सांगितले आहे.